हिन्दी

ऐ खुदा- दे जवाब मेरे सवाल का - वीर भद्र पंत

ऐ खुदा- दे जवाब मेरे सवाल का - वीर भद्र पंत

ऐ खुदा-दे जवाब मेरे सवाल का,
मेरी जिंदगी इतनी ख़ामोश और मायूस क्यों है?
मेरे नयन इतने जले और भीगे क्यों हैं?
मेरी धड़कन इतने सहमे इतने धीमे क्यों हैं?
ऐ खुदा-दे जवाब मेरे सवाल का।

आँखों की नादानी और दिल की बेइमानी इस तरह मुझपे सजा क्यों हैं?
खामोश धड़कन और ख़ामोश, तू इसकी वज़ह क्यों है?
मेरी मोहब्बत और तेरी बेवफ़ाई, इस तरह मुझपे क़र्ज़ क्यों है?
ऐ खुदा-दे जवाब मेरे सवाल का।

उसकी जिंदगी मेरी जिंदगी से प्यारी क्यों है?
उसकी आवाज़ इस क़दर मेरे ज़हन पर हावी क्यों है?
अपनी तबाही अपने ही हाथों से , मैंने मांगी क्यों है?
ऐ खुदा-दे जवाब मेरे सवाल का।

उसका एहसास, उसकी यादें इस तरह मुझसे नाराज़ क्यों है?
मेरी हँसी, मेरी खुसी इस तरह मुझसे खफा क्यों है?
उसकी मुस्कुराहट और मेरी मौत इस तरह मुझको अज़ीज़ क्यों है?

ऐ खुदा- दे जवाब मेरे सवाल का।
ऐ खुदा-दे जवाब मेरे सवाल का।
ऐ खुदा-दे जवाब मेरे सवाल का।

💬 0 Comments ↗ 68 Shares 👁 12 Reads

Comments (0)

No comments yet — be the first to respond.

More in हिन्दी

लत तो ज़रूर है मुझे। - वीर भद्र पंत हिन्दी

लत तो ज़रूर है मुझे। - वीर भद्र पंत

लत तो ज़रूर है मुझे, वो भी बहुत बुरी है मुझे, चाहे उसके प्यार का कहो चाहे उसके नफरत का कहो। शाम हो गई दीवानगी की, जरुरत है बहोत रौशनी की, कुछ और है नहीं जलाने को, ले दे रहा अपना दिल…

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 25
काश तू चली आती - वीर भद्र पंत हिन्दी

काश तू चली आती - वीर भद्र पंत

तू गई तो ऐसा लगा जैसे जान ही निकल गई, मौत भी आती नहीं है, इस नज़र के सामने। तू नहीं तो ऐसा लगा जैसे कब्र में भी कैद हूँ, खुदा भी आता नहीं है, और तू भी आती नहीं। बार बार यूँ मारती हो…

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 20
एक दिन हम तुन्हे याद आएंगे। - वीर भद्र पंत हिन्दी

एक दिन हम तुन्हे याद आएंगे। - वीर भद्र पंत

एक दिन हम तुन्हे याद आएंगे। दिल से याद करो दिन में भी नज़र आयंगे नफरत करो गए तो टूट कर बिखर जायंगे चुनते रह जाओगे अपनी यादो को हम तुम्हे इतना याद आयंगे। तेरी गली में न आयंगे दुबारा …

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 40
नसीब से खुद को बचाया ऐसे। - वीर भद्र पंत हिन्दी

नसीब से खुद को बचाया ऐसे। - वीर भद्र पंत

नसीब से खुद को बचाया ऐसे कि, न मिल रही थी वो फिर भी पाया उसको, अब जो वो नहीं है बस रोते हैं और, सोचते हैं कैसे नसीब रुलाया मुझको। हंसाते हंसाते ये भूल गए हम, चाहा था क्या, क्या पा …

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 23