तू न आई तेरी याद आई- वीर भद्र पंत
कुछ लिखे ऐसा दिल को सुकूँ मिल जाए,
तू आये न आये साहिल करीब आ जाए,
हाथों में कुछ लिखा ही नहीं की यकीं आ जाए,
रोते रोते तू ना सही तेरी याद आ जाए।
मेरे प्यार का दरिया सुख चूका अब बारिश आ जाए,
सदियों से जकड़ी ज़ंज़ीर कम्बख़त कोई तोड़ जाए,
ज़ख्मों को बेपर्दा कोई मरहम दे जाए,
मुझे फिर एक और ज़िन्दगी कोई दे जाए।
रातों की नींद तेरी यादों पर कुर्बान हो जाए,
चुप्पी तोड़ने का ये तरीका शायद काम आ जाए,
तेरे मासूम चेहरे से कैसे नज़र हट जाए,
एक पल की जुदाई और मौत आ जाए।
तू बेवफ़ा पर तेरी याद वफ़ा कर जाए,
चैन से जीने की तमन्ना तबाह हो जाए,
डरता है दिल की तुझे कैसे भुलाया जाए,
तेरे लबों से पी कर ज़हर शायद मौत आ जाए।
तेरे किये वादे पर अब इज़हार आ जाए,
शायद किसी बात का यकीं आ जाए,
तुझे देखने की तमन्ना अधूरी रह जाए,
नींद खुले और सामने तू आ जाये।
कफ़न ओढ़ते हे तेरा दुपट्टा याद आ जाए,
आंसुओं के भंवर में कोई साहिल आ जाए,
तेरे साथ जीने की ख़ालिस, ख़लिश हे रह जाए,
मौत के दरवाज़े से कोई मुझे उठा ले जाए।
रात उलझे और दिन कहीं सो जाए,
तारों के बीच एक तारा और टूट जाए,
तेरी याद गहरी और गहरी चोट पहुँचा जाए,
दफ़न होते ही क़ब्र में नींद टूट जाए।
कातिल तस्वीर तेरी फिर मुझे मार जाए,
जैसे नब्ज़ कटते ही लहू बाहर आ जाए,
लौ में पिघलती ज़िन्दगी राख़ हो जाए,
और उस राख से तेरी मांग सज जाए।
मुझसे किये वादे पर तुझे ऐतबार हो जाए,
रूठी हुई ज़िन्दगी फिर हैरान हो जाए
अगर तू लौट कर कभी मेरे पास आये,
बाहों में भर कर मुझे, तू फिर मार जाए।
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