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तू ही था वो दोस्त हमेशा।- वीर भद्र पंत

तू ही था वो दोस्त हमेशा।- वीर भद्र पंत

तू न था दुश्मन मेरा
तो क्यों न मिले पहले कभी?
यूँ तो टूटता है ख्याल मेरा,
तो क्यों न पहले जगाये कभी??

जिंदगी तेरे साथ का मोहताज़ है,
सांसे जिंदगी का मोहताज़ है,
साँसे हवाओं का मोहताज़ है,
हवाएँ फ़िज़ाओं का मोहताज़ है।

बहुत रुलाते हैं फ़िज़ाएं मुझे,
तो क्यों न लगाये गले पहले कभी?
यूँ तो टूटता है ख्याल मेरा,
तो क्यों न पहले जगाये कभी?

तू न था दूर इतना साया मेरा,
तो क्यों न पहले सुलाये कभी?
यूँ तो टूटता है ख्याल मेरा,
तो क्यों न पहले जगाये कभी?

कोई ख़ुशी में डूबा, कोई गम में डूबा है।
एक साथ गम और ख़ुशी का झोंका है,
पता नहीं खुद को कैसे रोने से रोका है,
ख़ुशी और गम दोनों आंसुओं में डुबोया है।

तुझको दूर रहने की ख़ुशी ज़रूर है,
उतना ही गम मुझपे नूर है,
पता नहीं कैसे लिखा वो फ़साना है,
एक एक शब्द खुदा क़सम लहू में डुबोया है।

तुझे याद करूँगा साया मेरा,
हो सके तो मिलना कभी,
यूँ तो टूटता है ख्याल मेरा,
तो क्यों न पहले जगाये कभी?

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