जी तो हम रहे हैं। - वीर भद्र पंत
जी तो हम रहे हैं,पर जान नहीं साथ मेरे,
सुना है कोई खाली जाता नहीं दर से तेरे।
अब तो शायद मर के भी न मिल पाऊं उससे
मीट जायेगी उसकी याद भी मौत के साथ मेरे
क़त्ल किआ अरमानो का और जिन्दा छोड़ दिया मुझको,
दिल टूटा जैसे मेरा और तोड़ दिया सपनो को मेरे।
ये अरमान की तू आये या मौत आ जाए,
जले हुए अरमानो की अर्थी दफ़नादे अब साथ मेरे।
दिल तूने तोड़ दिया और छोड़ दिया मरने को मुझको,
और मैंने मांगी खुशियाँ उस रब से हक़ में तेरे।
जी तो हम रहे हैं,पर जान नहीं साथ मेरे,
सुना है कोई खाली जाता नहीं दर से तेरे।
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