A poetry journal · Est. 2026

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मेरी मौत मुक़मल कर दे- वीर भद्र पंत हिन्दी

मेरी मौत मुक़मल कर दे- वीर भद्र पंत

ऐ मालिक मेरी मौत मुझे मुक़मल कर दे, कम से कम एक बार मुझे फ़िर नयी मौत दे दे, जला मुझे, काट मुझे, फ़िर से वो तड़प दे दे, ऐ मालिक मेरी मौत को मेरे मुक़मल कर दे। दिन अब गुज़रता है जैसे दिल …

V Vir Bhadra Pant ·
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क्या अब मर जाऊं मैं? - वीर भद्र पंत हिन्दी

क्या अब मर जाऊं मैं? - वीर भद्र पंत

जीवन मेरा माटी का ढेर, कुछ न मिला देर सवेर, चाहा कुछ कर जाऊं मैं, क्या अब मर जाऊं मैं? जीवन में मायूसी का आलम, बस बचा है दुःख और गम, लगता है अब लायक नहीं मैं, क्या अब मर जाऊं मैं? …

V Vir Bhadra Pant ·
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जी तो हम रहे हैं। - वीर भद्र पंत हिन्दी

जी तो हम रहे हैं। - वीर भद्र पंत

जी तो हम रहे हैं,पर जान नहीं साथ मेरे, सुना है कोई खाली जाता नहीं दर से तेरे। अब तो शायद मर के भी न मिल पाऊं उससे मीट जायेगी उसकी याद भी मौत के साथ मेरे क़त्ल किआ अरमानो का और जिन्द…

V Vir Bhadra Pant ·
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ये सिगरेट। - वीर भद्र पंत हिन्दी

ये सिगरेट। - वीर भद्र पंत

पल पल जलती, हलक से उतरती, मीठी मीठी कसक वाली, खुद को मेरे लिए जलाती, मेरे हाथ की वो जलती सिगरेट। बिलकुल उसके एहसास की तरह, अधजले तड़पते प्यास की तरह, अपने बचे राख की गर्मी से, जर जर…

V Vir Bhadra Pant ·
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How to tell you? - by Vir Bhadra Pant English

How to tell you? - by Vir Bhadra Pant

How to tell you, how much i love you... Only my tears can answer . How to tell you, how much i miss you... Only my eyes can answer. How to tell you, how much i desire you... Only m…

V Vir Bhadra Pant ·
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नसीब से खुद को बचाया ऐसे। - वीर भद्र पंत हिन्दी

नसीब से खुद को बचाया ऐसे। - वीर भद्र पंत

नसीब से खुद को बचाया ऐसे कि, न मिल रही थी वो फिर भी पाया उसको, अब जो वो नहीं है बस रोते हैं और, सोचते हैं कैसे नसीब रुलाया मुझको। हंसाते हंसाते ये भूल गए हम, चाहा था क्या, क्या पा …

V Vir Bhadra Pant ·
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My love is strong. - Vir Bhadra Pant English

My love is strong. - Vir Bhadra Pant

Everything hurts because of you, Why must it break the heart in two? Why can’t this love be soft and mild? Just give me one good reason, child. Why does this love feel far too stro…

V Vir Bhadra Pant ·
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ऐ खुदा- दे जवाब मेरे सवाल का - वीर भद्र पंत हिन्दी

ऐ खुदा- दे जवाब मेरे सवाल का - वीर भद्र पंत

ऐ खुदा-दे जवाब मेरे सवाल का, मेरी जिंदगी इतनी ख़ामोश और मायूस क्यों है? मेरे नयन इतने जले और भीगे क्यों हैं? मेरी धड़कन इतने सहमे इतने धीमे क्यों हैं? ऐ खुदा-दे जवाब मेरे सवाल का। आँ…

V Vir Bhadra Pant ·
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