Language

Hindi

हिन्दी

9 poems · page 1

लत तो ज़रूर है मुझे। - वीर भद्र पंत हिन्दी

लत तो ज़रूर है मुझे। - वीर भद्र पंत

लत तो ज़रूर है मुझे, वो भी बहुत बुरी है मुझे, चाहे उसके प्यार का कहो चाहे उसके नफरत का कहो। शाम हो गई दीवानगी की, जरुरत है बहोत रौशनी की, कुछ और है नहीं जलाने को, ले दे रहा अपना दिल…

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 25
काश तू चली आती - वीर भद्र पंत हिन्दी

काश तू चली आती - वीर भद्र पंत

तू गई तो ऐसा लगा जैसे जान ही निकल गई, मौत भी आती नहीं है, इस नज़र के सामने। तू नहीं तो ऐसा लगा जैसे कब्र में भी कैद हूँ, खुदा भी आता नहीं है, और तू भी आती नहीं। बार बार यूँ मारती हो…

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 20
एक दिन हम तुन्हे याद आएंगे। - वीर भद्र पंत हिन्दी

एक दिन हम तुन्हे याद आएंगे। - वीर भद्र पंत

एक दिन हम तुन्हे याद आएंगे। दिल से याद करो दिन में भी नज़र आयंगे नफरत करो गए तो टूट कर बिखर जायंगे चुनते रह जाओगे अपनी यादो को हम तुम्हे इतना याद आयंगे। तेरी गली में न आयंगे दुबारा …

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 40
तू न आई तेरी याद आई- वीर भद्र पंत हिन्दी

तू न आई तेरी याद आई- वीर भद्र पंत

कुछ लिखे ऐसा दिल को सुकूँ मिल जाए, तू आये न आये साहिल करीब आ जाए, हाथों में कुछ लिखा ही नहीं की यकीं आ जाए, रोते रोते तू ना सही तेरी याद आ जाए। मेरे प्यार का दरिया सुख चूका अब बारि…

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 19
तुझको ना भुला पाये- वीर भद्र पंत हिन्दी

तुझको ना भुला पाये- वीर भद्र पंत

तुझको बहोत चाहा पर तुझको न पाया हमने, तेरी बेरुखी को इस कदर सुर में पिरोया हमने, की रस्म समझ कर इस जुदाई को भी निभाया हमने। दिल के दरिया में आग लगी और बरस रही हैं आँखे मेरी, तेरे इ…

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 22
वो हैं बेखबर। - वीर भद्र पंत हिन्दी

वो हैं बेखबर। - वीर भद्र पंत

अब किस को बेखबर देखते हैं, ये दिन को रात होते देखते हैं। उसकी याद जब आ जाती है, बादलों में उसकी सूरत देखते हैं। आती नहीं वो शायद कहीं खो गई है, की पहले सी रही नहीं वो बदल गई है। अब…

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 16
कलम उम्मीद ग़ज़ल ख़ुशी। - वीर भद्र पंत हिन्दी

कलम उम्मीद ग़ज़ल ख़ुशी। - वीर भद्र पंत

जिंदगी के अफ़साने कुछ ऐसे लिखता गया कलम उम्मीद ग़ज़ल खुसी गाता चला गया। आय दिन हैं बहार के नाच लूँ आज मैं इस तरह नगमे वफ़ा के गाता चला गया। दिल में यूँ तेरी याद लिए हस्ता हूँ कुछ ऐसे अ…

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 12
पल में गुज़रती ये ज़िंदगी — वीर भद्र पंत हिन्दी

पल में गुज़रती ये ज़िंदगी — वीर भद्र पंत

पल में गुज़रती ये ज़िंदगी, लपटों में सिमटती ये ज़िंदगी। ख़ामोश हूँ मैं भी, और तू भी, कुछ भी न कहती ये ज़िंदगी। पल-पल, हर पल यूँ ही जैसे, ज़र्रा-ज़र्रा जलता गया, आज की इस महफ़िल में…

V Vir Bhadra Pant ·
💬 0 👁 10