A poetry journal · Est. 2026

Words of a True Lover

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I heard - Vir Bhadra Pant English

I heard - Vir Bhadra Pant

I heard every thing grows on earth.. Then why not i? Am i not a living being.. To breathe and to take birth? I heard he takes everyone to his hand.. Then why not i? Am i not made u…

V Vir Bhadra Pant ·
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How to tell you? - by Vir Bhadra Pant English

How to tell you? - by Vir Bhadra Pant

How to tell you, how much i love you... Only my tears can answer . How to tell you, how much i miss you... Only my eyes can answer. How to tell you, how much i desire you... Only m…

V Vir Bhadra Pant ·
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कलम उम्मीद ग़ज़ल ख़ुशी। - वीर भद्र पंत हिन्दी

कलम उम्मीद ग़ज़ल ख़ुशी। - वीर भद्र पंत

जिंदगी के अफ़साने कुछ ऐसे लिखता गया कलम उम्मीद ग़ज़ल खुसी गाता चला गया। आय दिन हैं बहार के नाच लूँ आज मैं इस तरह नगमे वफ़ा के गाता चला गया। दिल में यूँ तेरी याद लिए हस्ता हूँ कुछ ऐसे अ…

V Vir Bhadra Pant ·
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पल में गुज़रती ये ज़िंदगी — वीर भद्र पंत हिन्दी

पल में गुज़रती ये ज़िंदगी — वीर भद्र पंत

पल में गुज़रती ये ज़िंदगी, लपटों में सिमटती ये ज़िंदगी। ख़ामोश हूँ मैं भी, और तू भी, कुछ भी न कहती ये ज़िंदगी। पल-पल, हर पल यूँ ही जैसे, ज़र्रा-ज़र्रा जलता गया, आज की इस महफ़िल में…

V Vir Bhadra Pant ·
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तेरे बिन मेरे जज़्बात हैं तन्हा  — वीर भद्र पंत हिन्दी

तेरे बिन मेरे जज़्बात हैं तन्हा — वीर भद्र पंत

तेरे बिन मेरे जज़्बात हैं तन्हा, कितनी ये जवाँ रात है तन्हा। किससे करूँ बयाँ जज्बातों को, लब पर आते ख़यालात हैं तन्हा। तुम दे गए थे अपनी एक निशानी, उस मुस्कान की सौग़ात है तन्हा। ह…

V Vir Bhadra Pant ·
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फिर उसकी याद आई — वीर भद्र पंत हिन्दी

फिर उसकी याद आई — वीर भद्र पंत

फिर उसकी याद आई और कर गई तन्हा, जी रहा था जो ज़िंदगी, वो हो गई फ़ना। अब तो जीते जी बस है मौत का मंज़र, काश वो उतार देती इस सीने में ख़ंजर। तकलीफ़ होती मुझे, पर मैं सह लेता, शायद मर…

V Vir Bhadra Pant ·
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इस कदर क्यों तड़पाये मुझको — वीर भद्र पंत हिन्दी

इस कदर क्यों तड़पाये मुझको — वीर भद्र पंत

ज़िंदगी मेरी मौत से बदतर, किसी ने न समझा मुझको, न चाहा, न दिल में जगह दी, किसी ने न पूछा मुझको। दिल पत्थर और ख़ुदा भी पत्थर, न दिखा, न दिखलाया मुझको, तू भी तो था ख़ुदा मेरा तो, क्य…

V Vir Bhadra Pant ·
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तू ही था वो दोस्त हमेशा।- वीर भद्र पंत हिन्दी

तू ही था वो दोस्त हमेशा।- वीर भद्र पंत

तू न था दुश्मन मेरा तो क्यों न मिले पहले कभी? यूँ तो टूटता है ख्याल मेरा, तो क्यों न पहले जगाये कभी?? जिंदगी तेरे साथ का मोहताज़ है, सांसे जिंदगी का मोहताज़ है, साँसे हवाओं का मोहताज़…

V Vir Bhadra Pant ·
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